फिर से सुर्खियों में पेगासस स्पाईवेयर, 40 से ज्यादा पत्रकारों समेत 300 भारतीयों पर जासूसी का आरोप

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भारत में जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस एक बार फिर चर्चा में है. दरअसल द गार्जियन अख़बार ने अपने एक रिपोर्ट के जरिए दावा किया है कि भारत समेत दुनिया की कई सरकारें पेगासस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, मंत्रियों और विपक्षी नेताओं समेत कई बड़ी हस्तियों की जासूसी करवा रही हैं. सरकार पर 300 भारतीयों के जासूसी का आरोप है, जिसमें 40 से ज्यादा पत्रकार शामिल हैं। जिसके बाद ‘द वायर’ समेत कई मीडिया संस्थानों और विपक्षी नेताओं ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया. हालांकि सरकार ने इसका खंडन करते हुए कहा है कि सरकार पर कुछ लोगों की जासूसी करने का आरोप बेबुनियाद और ग़लत है. संसद में आईटी मंत्री ने इस पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा था कि अनाधिकृत तरीके से सरकारी एजेंसी द्वारा कोई टैपिंग नहीं की जाती है. राष्ट्रीय सुरक्षा या किसी बड़ी वजह के कारण ही तय प्रोटोकॉल के तहत सरकारी एजेंसियों द्वारा इंटरसेप्शन किया जाता है. छापी गई यह रिपोर्ट तथ्यहीन और पूर्वाग्रह से ग्रसित है. वहीं इस मामले में अब सॉफ्टवेयर बनाने वाली इजरायली टेक कंपनी NSO ग्रुप ने भी इसको तथ्यहीन और वास्तविकता से दूर बताया है. NSO ग्रुप ने कहा है कि यह रिपोर्ट गलत धारणाओं पर तैयार की गई है और न ही प्रमाणिकता के लिए किसी दस्तावेज का हवाला दिया गया है. साथ ही इस रिपोर्ट को जारी करने वालों के खिलाफ़ कंपनी मानहानि का मुकदमा करने के विचार में है. वहीं आज मानसून सत्र के पहले दिन संसद में इस मामलें पर बात हो सकती है.

क्या है पेगासस सॉफ्टवेयर और यह क्या करता है?

इजरायल की साइबर इंटेलिजेंस और सेक्युरिटी फर्म NSO ग्रुप द्वारा तैयार किया गया यह सॉफ्टवेयर दुनिया के सबसे खतरनाक जासूसी सॉफ्टवेयर्स में से एक है. यह एंड्रॉयड और आईओएस दोनों प्रकार के डिवाइस की जासूसी कर सकता है. इस सॉफ्टवेयर की ख़ास बात यह है कि इसमें यूजर को पता ही नहीं चल पाता कि उसका डिवाइस हैक हो चुका है. यह फोन में मौजूद डाटा को पढ़ सकता है, कैमरे और माइक्रोफोन की मदद से यूजर की बातचीत को सुन सकता है और जीपीएस आदि फीचर को भी इस्तेमाल कर सकता है. इसे मालवेयर के तौर पर यूजर की इजाजत और जानकारी के बिना भी इंस्टॉल किया जा सकता है. एक मिस्ड कॉल के जरिए भी इसे यूजर के डिवाइस में इंस्टॉल किया जा सकता है.

पहले भी रह चुका है विवादों में

2016 में UAE के एक मानवाधिकार कार्यकर्ता अहमद मंसूर का फोन हैक करने के प्रयासों के बाद पेगासस चर्चा में आया. 2018 में सऊदी अरब के पत्रकार जमाल खगोसी के हत्याकांड में भी पेगासस का नाम आया था. यह सॉफ्टवेयर 2019 में सुर्खियों में तब आया जब फेसबुक अधिकृत व्हाट्सऐप ने दावा किया कि इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हुए कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और भारतीय पत्रकारों पर जासूसी की जाती है. कंपनी ने अमेरिका में NSO ग्रुप के खिलाफ़ केस भी दर्ज किया और उन सुरक्षा से जुड़ी तकनीकियों को भी सही किया जिसके द्वारा पेगासस का इस्तेमाल किया जाता रहा और मामले की जाँच के लिए अपनी एक समिति भी बैठाई. हालांकि NSO ग्रुप ने हमेशा से ही इनका खंडन करते हुए यह साफ किया कि वह इस सॉफ्टवेयर को दुनियाभर की सरकारों को सुरक्षा और आतंकवाद पर रोक लगाने के उद्देश्य से मुहैया कराता है. फिर भी कई सरकारों पर पेगासस के मनचाहे इस्तेमाल और दुरूपयोग के आरोप लगे हैं.

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Aman Pratap Singh

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