Jehanabad स्थित लोमस ऋषि की गुफा का ऐतिहासिक महत्त्व: Bihar Tourism

The Lomas Rishi Cave or Lomas Rishi Gufa is a part of the Barabar Pahad or Barabar Hills, and attracts huge crowd from the nearby region. The Jehanabad located cave is a Mauryan era architectural beauty, adored by a number of historians and archeologists.

Lomas Rishi ki Gufa, Lomas Rishi Cave in Barabar Pahad or Barabar Caves.
Lomas Rishi ki Gufa or Lomas Rishi Cave in Jehanabad. (Courtesy: IncredibleIndia)

The Ganga Times, Travogent: लोमस ऋषि की गुफा, जिसे लोमस ऋषि की कुटिया (Lomas Rishi Cave) भी कहा जाता है, बिहार राज्य के जहानाबाद जिले (Jehanabad) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण पौराणिक धरोहर है। वाणावर (Barabar Pahad) और नागार्जुन की पहाड़ियों के बीच स्थित यह मानव निर्मित गुफा अपने ऐतिहासिक महत्त्व और वास्तु-कला दोनों के लिए विख्यात है। पहाड़ों को काट कर बनाई गई यह गुफा का निर्माण तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में मौर्य साम्राज्य के सम्राट अशोक (Samrat Ashoka) के काल में हुआ था। इस गुफा के प्रवेश द्वार पर झोपड़ी की शैली का है जोकि प्राचीन भारत के कील धनुष जैसे मुखौटे के आकार का सबसे पुराना नमूना है।

क्यों है इतना ख़ास? (Architectural beauty of the Lomas Rishi Cave in Barabar Pahad)
मौर्य सम्राट अशोक (Mauryan King Ashoka) के शासनकाल के दौरान, लोमस ऋषि गुफा की खुदाई की गई थी और अजीविक भिक्षुओं को उपहार में दी गई थी। यह तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व का बताया जाता है। 19वीं शताब्दी के अपने ‘गुफा मंदिर सर्वेक्षण’ में, ब्रिटिश पुरातत्त्वविद् जेम्स बर्गेस (British archeologist James Burgess) ने लोमस ऋषि गुफा को गुफा कालक्रम-निर्णय-विज्ञान में एक मील का पत्थर माना था। इतिहासकार पिया ब्रांकासिओ (Pia Brancaccio) के अनुसार, लोमस ऋषि गुफा और पास की सुदामा गुफा (Sudama Cave) को कई विद्वान पश्चिमी डेक्कन की गुफाओं का एक आदर्श मानते हैं।

Lomas-Rishi-Cave-barabar pahad
Lomas Rishi Caves entrance gate (Courtesy: PatnaBeats)

लोमस ऋषि की गुफा का वास्ता किस धर्म से है? (Religious affiliation of the Lomas Rishi Cave in Barabar Pahad Hills)

हालाँकि लोमस ऋषि की गुफा (Lomas Rishi Cave) किस घर्म से वास्ता रखती है यह पता कर पाना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन माना जाता है कि यह आजीविक भौतिकवादी संप्रदाय से जुडी हुई थी। आजीविक कौन थे? ये भारत के एक प्राचीन धार्मिक और दार्शनिक समूह थे, जिनकी उत्पत्ति जैन धर्म (Jain Dharma) के समय की बताई जाती है। कई इतिहासकारों का मानना है कि आजीविक नास्तिक थे और वेदों के साथ-साथ बौद्ध धर्म के विचारों को भी अस्वीकार करते थे। इनका समुदाय काफी तपस्वी हुआ करता था और बराबर कि गुफाओं (Barabar Pahad) में ध्यान करते थे। समय के साथ आजीविक विलुप्त हो गए।

Keep visiting The Ganga Times for such interesting tourism stories by Travogent from Bihar and India, Bihar News, India News, and World News. Follow us on FacebookTwitter, and Instagram for regular updates.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *