आखिर क्यूँ मनाते है अप्रैल फूल? History of April Fool in India

April Fools’ Day or April Fool’s Day is an annual custom on April 1 where people joke and prank with others. Some people in India call April Fool as National Jumla Day. Some say the history of April Fool is associated with the marriage of Richard II, King of England and his first wife, Anne of Bohemia.

History of April Fool in India and the world.

The Ganga Times, April Fool: 1st April को हम April Fool day or April Fools के रूप में क्यों मनाते आये है? इसका कोई ठोस सबूत नहीं है। मोदी जी (Modi Ji) के अच्छे दिन की तरह यह भी एक रहस्य है। नेहरू जी (Nehru Ji) के बारे में फैलाए मिथ्यों की तरह ही इसको लेकर भी अलग-अलग कहानियाँ सुनाई जाती है।

मुफ्त का ज्ञान तो सब देते है मगर आइए हम जानते है इतिहासकारों द्वारा बताये कुछ तथ्य और प्रचलित कारण।

इतिहासकार बताते हैं कि अप्रैल फूल का इतिहास आज से करीब 438 साल पुराना है। जब 1582 में France ने जूलियन कैलेंडर (Julian Calendar) को छोड़कर ग्रेगोरियन कैलेंडर (Gregorian Calendar) अपनाया था। जूलियन कैलेंडर में नया साल 1 अप्रैल को शुरू होता था। जबकि ग्रेगोरियन कैलेंडर में यह 1 January पर शिफ्ट हो गया।

जैसे अभी नोटबन्दी (Demonetisation) के फायदे को कोई नही समझ पाया ठीक वैसे ही उस वक़्त भी कैलेंडर बदलने के बाद भी कई लोग इस बदलाव को समझ नहीं पाए। वे 1 अप्रैल को ही नया साल मना रहे थे। इस कारण वे मजाक का पात्र बन गए और उन्हें अप्रैल फूल (April Fools) कहा जाने लगा।

History of April Fool in India: National Jumla Day

कुछ लोग April fool day को वसंत से जोड़कर भी देखा करते है। इसकी थ्योरी कुछ इस प्रकार दी गई है कि यह वसंत का पहला दिन होता है (खासकर उत्तरी गोलार्ध में)। जैसे चुनाव के दौरान वोटरों को बड़े-बड़े सपने दिखा के लुभाया जाता है ठीक उसी तर्ज पर ये वो समय है जब प्रकृति अपने रंग बिरंगे फूल और अलग अलग रंगों से लोगों को बेवकूफ बनाती हैं।

History of April Fool in Europe, Rome, England

आगे कुछ इतिहासकारों ने अप्रैल फूल डे को हिलेरिया (Hilaria) से भी जोड़ा है। यह एक लैटिन (Latin) शब्द है जिसका मतलब होता है, आनंदित (Joyful)। हिलेरिया प्राचीन रोम में वहां के एक समुदाया द्वारा मनाया जाने वाला एक त्योहार रहा है। इसे मार्च के अंत में मनाते थे और जैसे नेहरू जैकेट को अब मोदी जैकेट के रूप में देखा जाता है ठीक वैसे ही इस दिन भी लोग किसी दूसरे इंसान का वस्त्र पहन व वेश बनाकर दूसरों को बेवकूफ बनाते थे।

History of April Fool Day is associated with Hilaria Festival — an ancient festival of Rome.
History of April Fool Day is associated with Hilaria Festival — an ancient festival of Rome. (Courtesy: The Telegraph)

कुछ लोगो का कहना यह भी है कि पहला April Fool Day साल 1381 में मनाया गया था। दरअसल इसके पीछे एक मजेदार वाक्या बताया जाता है। इंग्लैंड के राजा रिचर्ड द्वितीय (Richard II) और बोहेमिया की रानी एनी ने सगाई का ऐलान किया था। और जैसे हमारे प्रिय Rahul Bhaiya एक दफा आलू से सोना बनाने की बात करते है वैसे ही राजा रानी ने सगाई के लिए 32 मार्च 1381 का दिन चुना। लोग पहले बेहद खुश हो गए और जश्न मनाने लगे। बाद में उन्हें एहसास हुआ कि ऐसा कोई दिन तो आता ही नहीं। 1 अप्रैल को तभी से Fool Day के रूप में मनाने की शुरुआत हो गई।

खैर, यह सब तो थी इतिहासकारों की बातें और उनके द्वारा दिये तर्क। अब अगर आप मेरी मानें तो इन तर्क और वजहों के चक्कर मे ना पड़े। 1 अप्रैल Fool Day होता है और सिर्फ इस दिन ही नही बल्कि हर दिन मज़ाक करे, मज़ाक बनाए। किसी का मज़ाक उड़ाने से कोई इंसान ना तो बड़ा हो जाता है और ना ही कोई छोटा। जैसे 50 साल कांग्रेस को सह लिए और जैसे अभी मोदी जी के जुमलों को सह रहें है, ठीक वैसे ही मज़ाक को भी सहने की सहनशक्ति लाए।

बाकी हँसने से देश का विकास होगा या नही होगा यह तो नही पता मुझे लेकिन आपको इस बात की गारंटी ज़रूर देते है कि हँसने से शरीर में दौड़ रहे खून का विकास ज़रूर हो जाएगा।

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