ऐसे थे हमारे राजेंद्र बाबू; जानिए बिहार के नायक, देश के प्रथम राष्ट्रपति के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य: Dr Rajendra Prasad Jyanti

The country is celebrating the birth anniversary of Dr Rajendra Prasad, the first president of India. Know some interesting facts about the Bihar-born leader, who went on to become one of the most important figures in the Indian independence movement.

Rajendra Prasad, the first President of India
  • डॉ राजेंद्र प्रसाद (Dr Rajendra Prasad) का जन्म 3 दिसंबर 1884 को बिहार के जीरादेई में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा छपरा के एक जिला स्कूल में हुई थी।
  • डॉ राजेंद्र प्रसाद बिहार के एक कॉलेज में अंग्रेजी के प्रोफेसर थे, लेकिन बाद में उन्होंने कानून की डिग्री हासिल की।
  • 1911 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए और बिहार के शीर्ष नेता बन कर उभरे। उन्होंने महात्मा गांधी के नेतृत्व में देश की आजादी की लड़ाई में अतुलनीय योगदान दिया।
  • राजेंद्र बाबू 1931 के नमक सत्याग्रह आंदोलन और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान ब्रितानी सरकार द्वारा गिरफ्तार भी किये गए। इसके अलावा उन्हें कई बार जेल की हवा भी भी खानी पड़ी।
  • बचपन में, राजेंद्र प्रसाद को उनके पिता एक मौलवी के पास फ़ारसी भाषा सीखने के लिए भेजा करते थे।
  • राजेंद्र प्रसाद कलकत्ता लॉ कॉलेज से स्नातक की पढाई की, 1937 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की पढ़ाई भी पूरी की और साथ ही स्वर्ण पदक विजेता रहे।
  • राजेंद्र बाबू ने 1908 में बिहार छात्र सम्मेलन का गठन पटना कॉलेज के हॉल में किया। बिहार छात्र सम्मेलन पूरे भारत में अपनी तरह का पहला संगठन था। इस संगठन ने बिहार को श्री कृष्ण सिन्हा, डॉ अनुग्रह नारायण आदि के रूप में कुछ प्रमुख नेताओं को दिया।
  • 1946 में गठित हुई अंतरिम राष्ट्रीय सरकार में उन्होंने खाद्य और कृषि मंत्री का कर्तव्य भी निभाया।
  • राजेंद्र बाबू भारतीय गणराज्य के इतिहास में दो कार्यकाल पूरे करने वाले एकमात्र राष्ट्रपति हैं। वो 1950 से 1962 तक देश के सर्वोच्च पद पर रहे।
  • डॉ. राजेंद्र प्रसाद (Dr Rajendra Prasad) भारत की संविधान सभा के अध्यक्ष के रूप काम करते हुए देश के संविधान को तैयार करने में अहम् भूमिका निभाई।
  • राजेंद्र प्रसाद ने कई पुस्तकों का लेखन किया जिनमें से निम्न महत्वपूर्ण है – खंडित भारत, बापू के क़दमों में, आत्मकथा, संस्कृत और संस्कृति।
  • राजेंद्र बाबू 28 फरवरी 1963 को हम सबको हमेशा के लिए छोड़कर चले गए। बिहार की राजधानी पटना स्थित स्मारक ‘राजेंद्र स्मृति संग्रहालय’ उनको समर्पित है।

We wish you adopt the lifestyle and teachings of Dr Rajendra Prasad and continue to make India Great. Jai Hind.

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