Madhya Pradesh Bypolls: शिवराज सरकार के 14 मंत्रियों की साख दांव पर

Madhya Pradesh CM Shivraj Singh Chouhan and the newly-joined BJP MP Jyotiraditya Scindia have will have their fate in the hands of voters on November 3.

Shivraj Singh Chouhan and his ministers (Courtesy: Outlook India)

Gaya, Bihar: 3 नवंबर को होने वाले मध्यप्रदेश की हाई प्रोफाइल उपचुनाव (Madhya Pradesh By-election) में शिवराज सरकार (Shivraj Government) के 14 मंत्रियों की किस्मत दावं पे रहेगी। विधानसभा के 28 सीटों के लिए होने वाले उपचुनावों का माहौल थम चुका है और प्रत्याशिओं ने अपनी भाग्य को मतदाताओं के हाथ में दे दिया है। मतदान के लिए महज कुछ घंटे ही शेष रह गए है। इन उपचुनावों की सबसे ख़ास बात यह है की इसमें में शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) और ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) गुट के 14 मंत्री का भाग्य जनता के हाथ में होगा। 

बता दें की इनमें से दो मंत्री अपना इस्तीफा पहले ही दे चुके हैं, लेकिन चुनाव में वो मंत्री की हैसियत से ही उतरेंगे। 

Path for Madhya Pradesh ministers are not going to be easy

पिछले कुछ वर्षों के परिणामों पर गौर करें तो इन् चुनावों में भी मंत्रियों की डगर आसान नहीं लग रही। शिवराज सरकार के 23 मंत्री पिछले दो विधानसभा चुनाव में जनता द्वारा घर का रास्ता दिखाए जा चुके हैं। वर्ष 2013 में 10 और 2018 में 13 मंत्री चुनाव हार गए थे। चुनावों में मंत्रियों के हारने के सिलसिले को देखे तो इस बार इनकी किस्मत का फैसला सुरक्षित यही लग रहा। यह देखना बहुत ही दिलचस्प होने वाला है कि इनमें से कितने मंत्री अपनी सीट बचा पाते हैं।

Rebel Congress MLAs of Madhya Pradesh and Jyotiraditya Scindia meeting BJP President JP Nadda (Courtesy: IANS)

11 ministers from Jyotiraditya Scindia camp

ज्योतिरादित्य खेमे (Jyotiraditya Camp) के 11 मंत्री भी हैं शामिल- तुलसी सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, प्रभु राम चौधरी, इमरती देवी, प्रद्युम्न सिंह तोमर, महेंद्र सिंह सिसोदिया, गिर्राज दंडोतिया, ओपीएस भदौरिया, सुरेश धाकड़, बृजेंद्र सिंह यादव, राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव, एदल सिंह कंसाना, बिसाहूलाल सिंह और हरदीप सिंह डंग। 

चुनौती उन कांग्रेस (Congress Party) छोड़ भाजपा (BJP) में गए 25 पूर्व विधायकों के सामने अपनी सीट बचने की होगी। हरदीप सिंह डंग महज 350 मतों से जीते थे और उनकी जीत सबसे छोटी थी। उनके अलावा नारायण पटेल (1236) और सुमित्रा देवी (1256) भी काफी काम मतों के अंतर से जीती थी। इन पर भी काफी नजरें रहेंगी। 

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