केपी ओली ने नेपाली संसद को किया भंग; दुबारा होंगे चुनाव; क्या ये भारत के लिए अच्छी खबर है?

Amid anti-government protests across the country and the resignations of a dozen of ministers from the cabinet, Prime Minister KP Sharma Oli dissolved the country’s House of Representatives or Pratinidhi Sabha on Sunday. A Fresh election has been called by the government in the months of April-May.

A file photo of the Prime Minister of Nepal, KP Sharma Oli. (Prakash Mathema/AFP)
A file photo of the Prime Minister of Nepal, KP Sharma Oli. (Prakash Mathema/AFP)

The Ganga Times, Gaya: नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली (Nepal PM KP Oli) ने देश की संसद – प्रतिनिधि सभा (Pratinidhi Sabha) को आम चुनावों के महज तीन साल बाद ही भंग करने की घोषणा कर दी है। इस फ़ैसले के बाद राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी (Nepal president Bidya Devi Bhandari) ने नेपाली संसद के निचली सदन के नए जनादेश के लिए अगले साल अप्रैल-मई के महीने में चुनावों की घोषणा कर दी है।

क्या है केपी ओली के फ़ैसले की वजह?
बताया जाता है की नेपाली प्रधानमंत्री केपी ओली की कैबिनेट (KP Oli cabinet) ने अपनी पार्टी के भीतर उभरते मतभेद के कारण संसद को भंग करने की सिफ़ारिश की थी. पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ (Pushpa Kamal Dahal ‘Prachand’), माधव कुमार नेपाल (Madhav Kumar Nepal) और झाला नाथ खनाल (Jhajha Nath Khanal) सहित एनसीपी के कई वरिष्ठ नेता लगातार केपी ओली पर एकतरफा तरीके से सरकार चलाने का आरोप लगाते रहे हैं।

बता दें की दिसंबर 2017 के चुनाव में केपी शर्मा ओली के नेतृत्व में तत्कालीन सीपीएन-यूएमएल (CPN-UML) और प्रचंड के नेतृत्व वाले सीपीएन-माओवादी सेंटर (CPN Maoist-Center) की गठबंधन ने दो-तिहाई बहुमत से सरकार बनाया था। 2018 में दोनों दलों ने आपस में विलय करने का निर्णय लिया और तब नेपाली कम्युनिष्ट पार्टी (Nepali Communist Party) का उदय हुआ था।

प्रधानमंत्री ओली (PM Oli) ने हाल में ही एक ऐसा अध्यादेश लाया था जिससे उन्हें विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति का अधिकार प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष और विपक्ष के नेता की सहमति के बगैर दिया गया था. प्रचंड और उनके साथी इस अध्यादेश को वापस लेने के लिए ओली पर दबाव डाल रही थी। इस बीच ओली कैबिनेट (Oli Cabinet) ने संसद को भंग करने की सिफारिश कर दी।

Prime Minister KP Sharma Oli and Pushpa Kamal Dahal (Courtesy: Kathmandu Post)

पहले से ही फ़ैसले के खिलाफ आक्रोशित हैं प्रचंड (Pushpa Kamal Dahal ‘Prachanda’)
अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल बीबीसी (BBC) से हुई बातचीत में प्रचंड ने कहा था, “इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ एकजुट होने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. यदि सरकार इस सिफारिश को तुरंत वापस नहीं लेती है, तो पार्टी किसी भी हद तक प्रधानमंत्री केपी ओली के खिलाफ जा सकती है.”
“प्रधानमंत्री का फैसला सीधे संविधान की भावना के खिलाफ था और यह लोकतंत्र का मखौल था. ऐसी सिफारिश लोकतांत्रिक प्रणाली के विपरीत है. यह निरंकुशता का स्पष्ट संकेत है. आज पार्टी की स्थाई समिति की बैठक में इस पर बात की जाएगी.”

भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा? (Impact of KP Oli’s decision on India)
अब यह भी जान लें की केपी ओली की इस महत्वाकांक्षी फैसले को भारत किस नजरिये से देखे। विशेषज्ञों का कहना है की यह संपूर्ण घटनाक्रम भारत के पक्ष में है। जिस तरह से नेपाल में केपी ओली सरकार (Nepal’s KP Oli Government) के खिलाफ लोग आक्रोशित होकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं उससे तो यही लगता है की ओली अप्रैल-मई में होने वाले चुनाव में हार जायेंगे। पिछले कुछ वर्षों में नेपाली प्रधानमंत्री (Nepali Prime Minister) ने कई दफा भारत-विरोधी बयान दिए हैं। माना जाता है की चीन से उनकी नजदीकी के कारण वो भारत के लिए अपने देश में नफरत पैदा कर रहे थे.

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