आख़िर क्या है 1991 का वह मामला जिसे सुनते ही भड़के नीतीश कुमार?

Yesterday, in the Bihar Vidhan Sabha, Tejashwi Yadav had accused Nitish Kumar of being a part of the 1991 murder case.

The Ganga Times, Gaya: कल शुक्रवार को तेजस्वी यादव ने बिहार विधानसभा (Bihar Vidhan Sabha) में नीतीश कुमार (Bihar CM Nitish Kumar) पर तीखा टिपण्णी के दौरान 1991 की घटना का जिक्र किया था। कई लोगों को इस घटना के बारे में काम ही पता है या नहीं ही पता है। आइये आज चर्चा करते हैं उसी 1991 की हत्याकांड के बारे में और जानते हैं नीतीश कुमार (Bihar CM Nitish Kumar) का इससे क्या संबंध है।

16 नवंबर 1991, पटना जिला , थाना पंडारक
इसी दिन बाढ़ क्षेत्र में मध्यावधि चुनाव के दौरान शिक्षक सीताराम सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसी घटना में नीतीश कुमार समेत पांच अन्य लोग नामजद थें। 2009 में मृतक के रिश्तेदार अशोक सिंह ने बाढ़ के एसीजेएम के समक्ष नीतीश के खिलाफ मामला चलाने का आग्रह किया था, जिसे निचली अदालत से मंजूरी मिल गई थी। हालांकि, पटना हाईकोर्ट ने 15 मार्च 2019 को नीतीश के पक्ष में फ़ैसला सुनाते हुए निचली अदालत को नीतीश के ख़िलाफ़ क्रिमिनल केस न चलाने का आदेश दिया।

क्या कहते हैं तेजस्वी यादव?
तेजस्वी यादव का कहना है कि अदालत अपना फ़ैसला जांच एजेंसियों द्वारा तैयार किए गए रिपोर्ट के अनुसार सुनाती है और कोई भी एसपी मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ रिपोर्ट तैयार कैसे करेगा। इसीलिए, नीतीश को इस्तीफा देकर इस मामले की जांच करवानी चाहिए थी।

Tejashwi Yadav and Nitish Kumar (Image: Tv9)

क्या है पूरा मामला?
1989 में बाढ़ से सांसद बने नीतीश 1991 के मध्य चुनाव में जनता दल के टिकट पर मैदान में थे। बकौल अशोक सिंह ( याचिकाकर्ता) शिक्षक सीता राम सिंह (मृतक) अपना वोट डालने के लिए लाइन में थे। तभी वहां नीतीश समेत अन्य 5 लोग आकर चुनाव बाधित करने लगे। इसी क्रम में हुई गोलीबारी में सीता राम सिंह मारे गए तथा अन्य चार घायल हो गए।
इन धाराओं में नामजद किए गए थे नीतीश:
धारा 147 ( दंगा), धारा 148 (घातक हथियार के साथ दंगा), धारा 149 (अवैध सभा करना), धारा 302 (हत्या), धारा 307 (हत्या का प्रयास)

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