बिहार में सरकार और विपक्ष में क्यों बढ़ रहा टकराव? Reason behind Nitish Kumar and Tejashwi Yadav’s anger?

Bihar’s government and opposition have been at constant battle for the last few months. Tejashvi Yadav Led opposition has been constantly attacking the BJP-JDU Nitish Kumar’s government.

Reason behind Nitish Kumar and Tejashwi Yadav's anger.

The Ganga Times, Bihar Politics: बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बिहार में कुछ ऐसा हो रहा है जो पहले कभी नहीं देखा गया। राज्य में सत्ता और विपक्ष के बीच ऐसी खाई बन चुकी है जो बिहार के इतिहास (history of Bihar politics) में आज तक नहीं हुई थी। इसकी शुरुआत उस दिन हुई थी जब पिछले हफ्ते सदन के अंदर पुलिस ने विपक्ष के नेताओं को घसीट घसीट कर मारा था। ऐसा भी नहीं है कि यह खींचातानी अचानक बढ़ी है। पिछले साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly election in November 2020) के बाद से ही दोनों पक्षों के बीच संबंध अच्छे नहीं रहे हैं।

इस तल्खी की शुरुआत विधानसभा चुनाव के ठीक बाद 16 नवंबर को ही हो गई थी, जब विपक्ष ने नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण समारोह (Nitish Swearing-in Ceremony) का बहिष्कार किया था। तब से आरजेडी नेता तेजस्वी यादव (RJD leader Tejashwi Yadav) की अगुवाई में विपक्ष नीतीश सरकार के खिलाफ मोर्चाबंदी कर रहा है। आये दिन दोनों पक्षों के बीच टकराव देखने को मिलता है। अजीब बात तब देखने को मिलती है जब आम तौर पर शांत रहने वाले सीएम नीतीश कुमार कई मौकों पर गुस्सा होते हुए दिखे। कई दफा मुख्यमंत्री का आप खोना सियासी चर्चाओं में रहा।

Bihar has seen a strong opposition after long time

विशेषज्ञों की मानना है कि कई सालों बाद बिहार में एक मजबूत और हमलावर विपक्ष का उदय हुआ है, जोकि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार हो रहे टकराव का एक कारण हो सकता है। 90 के दशक से ही, चाहे राजद का शासनकाल हो या फिर जदयू-भाजपा का गठबंधन काल, बिहार में सत्ता पक्ष बेहद मजबूत रहा है। करीब दो दशकों तक विपक्ष के पास सवाल पूछने की इतनी हिम्मत नहीं होती थी। नीतीश हो या लालू, दोनों को कभी मजबूत विपक्ष का सामना करने को नहीं मिला था और ना ही इसकी आदत थी।

कई जानकार मानते हैं कि पिछले कुछ दिनों में नीतीश कुमार के आक्रामक (Nitish Kumar angry) होने के पीछे यह भी एक कारण है की उनको ऐसे विरोध को काउंटर करने की आदत नहीं है। नवम्बर 2020 में हुए चुनाव में 244 सीटों वाले बिहार विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष को मिले सीटों के बीच का अंतर महज 15 रहा था। और जदयू को तो उनके सहयोगी भाजपा से भी काम सीटें मिली थी। शायद इसी कारण से नीतीश कुमार असहज महसूस (Nitish Kumar insecure) करते होंगे। और समय समय पर राजद-कांग्रेस भी अपने संख्या बल को इस्तेमाल करने में लगी रहती है।

चुकी सीटों का अंतर कम है, दोनों पक्षों को जनता के बीच सुपीरियर साबित करने का अतिरिक्त दबाव है। नीतीश पर दवाब है कि वो संख्या में छोटे होने के बावजूद जनता को ये सन्देश देना चाहते की सरकार उनके हाथ में हैं। साथ ही एनडीए गठबंधन (NDA alliance) को एकजुट बताने की भी चुनौती है। वहीं, विपक्ष अपनी संख्याबल के साथ पूरी तरह से सक्रिय होकर राज्य के मुद्दों को उठा रहा है और नीतीश सरकार पर हमलावर है।

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