– नीतेश उचबगले
मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा उपक्रम दुग्ध संघ सांची है, जिसे मध्य प्रदेश राज्य सहकारी डेयरी फेडरेशन के नाम से भी जाना जाता है। इसकी स्थापना सन 1977 में हुई थी। यह सांची ब्रांड नाम से दूध और दुग्ध उत्पादों की बिक्री करता है। लेकिन करीब चार महीने पहले उत्पादन की कमी का हवाला देते हुए इसे 5 साल के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) को सौंपा गया। मध्य प्रदेश में सांची के टोटल 6 संघ उज्जैन, जबलपुर, भोपाल, इंदौर, सागर और ग्वालियर दुग्ध संघ शामिल है।

इससे पहले MPCDF भोपाल के MD, पहले IAS हुआ करते थे वहीं, MD की जगह भी डेयरी विकास बोर्ड द्वारा राष्ट्रीय डेयरी सेवाएं से आए श्री संजय गोवानी को दी गई है । लेकिन जब से सांची का नियंत्रण, नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के हाथ में गया है, तब से लगातार दो बार जबलपुर दुग्ध संघ में तुगलकी फरमान जारी हुए है। इससे स्थानीय जबलपुर मुख्यालय एवं जिला स्तरीय अधिकारियों से लेकर दुग्ध देने वाले किसान भी परेशान है।
अधिकारियों के पेमेंट पर लगी लगाम
सोशल मीडिया पर दो पत्र वायरल हो रहे है, जिसमें जिला प्रभारियों को अजीबोगरीब निर्देश दिए गए है। इसमें कहा गया है कि इम्प्रेस्ट मनी यानी पहले ही चुकाई जाने वाली रकम ऑनलाइन पेमेंट ही मान्य होगा। वहीं, दो सौ रुपए से ज्यादा का कैश यानी नकदी पेमेंट नहीं कर सकते हैं। वहीं, ये जिला प्रभारीयों को, इस पेमेंट की रकम की रिकवरी के लिए खरीदी गई वस्तु के बिल या रशीद के साथ अपनी बैंक स्टेटमेंट की कॉपी भी लगानी होगी।
नाम न लिखने की शर्त पर एक दुग्ध संघ के प्रभारी ने बताया कि संयंत्र, मिनी डेयरी संयंत्र सहित दुग्ध शीत केंद्र के लिए कई बार अचनाक हजारों रुपए का पेमेंट करना पड़ता है। अगर ऐसा नहीं करेंगे तो काम ठप हो सकता है। वहीं दूध भी खराब हो सकता है, जिससे संघ को आर्थिक नुकसान हो सकता है। किसी के बैंक स्टेटमेंट की जानकारी लेना भी निजता के अधिकार का उल्लंघन माना जाता है। बावजूद इसके छोटी-छोटी चीजों के लिए भी जिला प्रभारियों को संघर्ष करना पड़ेगा। वहीं, इतना बड़ा संयंत्र चलाने में कई छोटी-बड़ी चीजों की जरूरत पड़ती है,पर कोई सुनवाई नहीं होती।
ये फरमान नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के सांची प्रोजेक्ट के सीईओ राहुल त्रिपाठी ने जारी किया है।
दूसरा फरमान पढ़ माथा पकड़ लेंगे
चार अगस्त को सीईओ राहुल त्रिपाठी ने एक और फरमान जारी किया है, जिसमें दुग्ध संघ में होने वाली चोरियों के लिए अप्रत्यक्ष रूप से जिला प्रभारियों को ही जिम्मेदार ठहराया गया है। इसमें कहा गया है कि संघ से किसी भी चोरी, जिसमें दूध या दुग्ध उत्पादों, सरकारी वाहन या उनके पार्ट्स चोरी होते हैं, तो चोरी हुई सामग्री से पचास गुना जुर्माना वसूला जाएगा। इतने में सीईओ साहब माने नहीं तो पुलिस कार्रवाई की बात की है। सूत्र बताते है कि, लंच टाइम किया गया आधा, 30 मिनट के लंच ब्रेक को 15 मिनट में खत्म करने के मौखिक निर्देशों की भी, जानकारी मिली है, हालांकि इसका कोई लिखित आदेश नहीं है, इसमें कितनी सत्यता है? पता नहीं ।
सांची हुआ NDDB के हवाले लेकिन प्रोग्रेस न के बराबर
आपको बता दें कि मार्च 2025 के पहले तक दुग्ध संघ का कुल दुग्ध संकलन लगभग 20 हजार लीटर प्रतिदिन था, जो कि अप्रैल माह 2025 से नए सीईओ राहुल त्रिपाठी के आने बाद केवल बाईस से तेईस हजार लीटर प्रतिदिन हुआ है, 3 माह बीत जाने के बाद भी यह प्रगति नहीं के बराबर है। वही हाल पैकेट दुग्ध की सेल के भी है, यही नहीं, सांची दुग्ध पदार्थों की पैकिंग न होने का हवाला देकर, कई सांची के प्रोडक्ट ही बंद करदिए गए है। दूसरी ओर किसानों का आज भी 3 महीने का पेमेंट अटका हुआ है, जिसमें अप्रैल 2024-जून 2024 जिस समय दुग्ध समितियों का दुग्ध संकलन अधिक था वो अभी भी रुका हुआ है, साथ ही वर्तमान का भुगतान भी 15 दिन पीछे है । सांची का सुदाना पशु आहार संयंत्र जी की अप्रैल मई तक चालू था। वह भी अचानक बंद हो गया था।
अनुभव के मामले भी कम है
नाम न लिखने की शर्त पर दुग्ध संघ से जुड़े अधिकारी ने बताया कि सीईओ राहुल त्रिपाठी का अनुभव जबलपुर दुग्ध संघ के पूर्व सीईओ अरुण चौधरी से भी कम बताया जा रहा है, जिन्हें डेयरी संबंधित समस्त गतिविधियां जैसे संयंत्र तकनीकि, मार्केटिंग, वित्त- लेखा, क्षेत्र संचालन, पर्चेस एवं अन्य प्रशासनिक अनुभव का अच्छा खासा ज्ञान था, वही वर्तमान सीईओ राहुल त्रिपाठी केवल क्षेत्र संचालन के कार्यों से परिचित है, जो बनारस दुग्ध संघ के क्षेत्र में दुग्ध संकलन/क्षेत्र संचालन संबंधित कार्य देखते थे,यही कारण है कि, अन्य शाखाओं का कार्य उन्हें समझ न आने के कारण, दुग्ध संघ के कई दैनिक कार्य बाधित हो रहे है, और स्थानीय अधिकारी कर्मचारी परेशान है ।
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