Tuesday, December 6
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Rajasthan Diwas: Maharana Pratap की जन्मभूमि राजस्थान कि गौरव गाथा

Rajasthan state came into existence on 30 March 1949 when Rajputana – the name adopted by the Britishers – was merged into the Dominion of India. Rajasthan Diwas or Rajasthan Day is celebrated across the state with pump and show every year on March 30.

Maharana Pratap (Courtesy: Naidunia)

The Ganga Times, Rajasthan Diwas: आज वीर-भूमि राजस्थान अपना 72वां स्थापना दिवस मना रहा है। जी हां, आज से 72 साल पहले आज ही के दिन राजस्थान राज्य की स्थापना की गई थी. साल 1949 में 22 रियासतों को मिलाकर राजपुताना राजस्थान की स्थापना की गई थी. इस एकीकरण में 8 साल 7 महीने और 14 दिन का वक्त लगा था. राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टिकोण से देश का सबसे बड़ा और जनसंख्या के मामले में सातवां बड़ा राज्य है.

गंगा टाइम्स की तरफ से आप सभी देशवासियों को राजस्थान दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं! 30 मार्च राजस्थान दिवस के रूप में मनाया जाता है। (30 March is celebrated as Rajasthan Day) इस दिन जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर और जयपुर रियासतों के विलय से “ राजस्थान संघ” का निर्माण हुआ था। इस दिन को राजस्थान के लोगों द्वारा बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है क्योंकि इस दिन राजस्थान की स्थापना हुई थी। आज के दिन राज्य में कई प्रकार के रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

Let’s know Rajasthan’s glorious history and culture on Rajasthan Diwas

राजस्थान की धरती पर वीर तो वीर, वीरांगनाएं भी अपनी माटी के लिए कुर्बानी देने में कभी नहीं झिझकीं। शौर्य और साहस ही नहीं बल्कि राजस्थान की धरती के सपूतों ने हर क्षेत्र में कमाल दिखाकर देश-दुनिया में राजस्थान के नाम को चांद-तारों सा चमका दिया। राजस्थान की धरती पर रणबांकुरों ने जन्म लिया है। यहां वीरांगनाओं ने भी अपने त्याग और बलिदान से मातृभूमि को सींचा है।

Hawa Mahal is a part of the glorious history of Rajasthan. (Credit: India Today/PTI)

यहां धरती का वीर योद्धा कहे जाने वाले पृथ्वीराज चौहान (Prithviraj Chauhan) ने जन्म लिया। जोधपुर के राजा जसवंत सिंह हो या उनके 12 साल के पुत्र पृथ्वी सिंह (Prithvi Singh), अपनी जाबांजी से प्रदेश का मान बढ़ाया। राणा सांगा (Rana Sanga) ने सौ से भी ज्यादा युद्ध लड़कर साहस का परिचय दिया था। पन्ना धाय (Panna Dhai) के बलिदान के साथ बुलन्दा (पाली) के ठाकुर मोहकम सिंह की रानी बाघेली का बलिदान भी अमर है। जोधपुर के राजकुमार अजीत सिंह को औरंगजेब (Aurangzeb) से बचाने के लिए वे उन्हें अपनी नवजात राजकुमारी की जगह छुपाकर लाई थीं।

राजस्थान शब्द का अर्थ ही है ‘राजाओं का स्थान’ क्योंकि यहां गुर्जर, राजपूत, मौर्य, जाट आदि ने पहले राज किया था। ब्रिटिश शासकों द्वारा भारत को आज़ाद करने की घोषणा करने के बाद जब सत्ता-हस्तांतरण की कार्यवाही शुरू की, तभी लग गया था कि आज़ाद भारत (Independent India) का राजस्थान प्रांत बनना और राजपूताना के तत्कालीन हिस्से का भारत में विलय एक मुश्किल कार्य साबित हो सकता है। आज़ादी की घोषणा के साथ ही राजपूताना के देशी रियासतों के मुखियाओं में स्वतंत्र राज्य में भी अपनी सत्ता बरकरार रखने की होड़ सी मच गयी थी, उस समय वर्तमान राजस्थान की भौगालिक स्थिति के नजरिये से देखें तो राजपूताना के इस भूभाग में कुल बाईस देशी रियासतें थी।

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