Friday, June 14
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Bengal का सियासी दंगल; क्या होगा battle of Nandigram का हल: West Bengal Election 2021

The battle of Nandigram is the hottest contest in West Bengal Election 2021.

The Ganga Times, West Bengal: पश्चिम बंगाल में मतदान का सिलसिला शुरू हो गया है और पहले चरण का मतदान भी हो चुका है। मतदान का दूसरा दौर गुरूवार, यानि 1 अप्रैल को होगा जिसमें कुल 30 सीटों पर उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमाएंगे। लेकिन इनमें से पूर्व मेदिनीपुर जिले की नंदीग्राम सीट काफी सुर्खियों में है.

आइए जानते हैं क्या है नंदीग्राम सीट के सुर्खियों में होने की वजह। क्या समीकरण बिठाया जा रहा है और कैसी दांवपेंच लगाई जा रही है पार्टियों के द्वारा इस सीट को अपने नाम करने के लिए। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ओर से इस सीट की कैंडिडेट हैं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनको चुनौती दे रहे हैं भारतीय जनता पार्टी (BJP) की तरफ से शुभेन्दु अधिकारी। शुभेन्दु पूर्व में टीएमसी के सदस्य रह चुके हैं और कभी ये ममता दीदी के करीबी हुआ करते थे, लेकिन आज दोनों आमने सामने हैं। शुभेन्दु वहाँ के स्थानीय निवासी हैं और ममता बनर्जी पर बाहरी होने का आरोप लगाते हैं, जबकि ममता बनर्जी 2007 के नंदीग्राम आंदोलन के समय से ही वहाँ से जुड़ी हुई हैं। इन वजहों से मुकाबला दिलचस्प होता दिखाई पड़ रहा है.

नंदीग्राम की सीट को बंगाल का सबसे HighProfile माना जा रहा है और इसके लिए दोनों पार्टियों ने अपनी पूरी ताक़त झोंक दी है। इधर ममता बनर्जी रविवार को ही इलाके आ चुकी हैं। 10 मार्च को नामांकन पत्र दायर करने के बाद ये उनका पहला आगमन है, और आते ही उन्होंने एक विशाल रैली को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने सोमवार को एक 8 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा के साथ दो रैलियां भी की। उन्होंने कहा है कि मैं एक अप्रैल को वोटिंग होने के बाद ही यहाँ से जाऊंगी।

दूसरी ओर बीजेपी ने अपनी पूरी फौज नंदीग्राम में उतार दी है। भाजपा की ओर से सभी बड़े नेता यहाँ भेजे गए। Narendra Modi, Amit Shah, Rajnath Singh, JP Nadda, Yogi Adityanath से लेकर तमाम नेता अभिनेता इस इलाके में चुनावी जनसभा कर चुके हैं, और कर रहे हैं। शुभेन्दु ने तो यहाँ तक कह दिया है कि अगर ममता को कम से कम पचास हजार मतों से न हराया तो सियासत से सन्यास ले लूंगा। इस प्रकार नंदीग्राम पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अंदर एक मिनी बैटल बन चुका है। सिर्फ बंगाल ही नहीं बल्कि पूरे देश में नंदीग्राम की चर्चायें हो रही है।

आइये जानते हैं कि वो वो कौन से मुद्दे हैं जो चुनाव परिणाम पर असर दाल सकते हैं।
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कहते हैं कि शुभेन्दु ने ममता को सिर्फ लड़ने की चुनौती दी थी, उनकी चुनौती स्वीकार करके ममता ने आधी लड़ाई तो पहले ही जीत ली है। टीएमसी ममता के इस निर्णय को मास्टरस्ट्रोक बताने में लगी है। वहीं दूसरी ओर भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय कहते हैं कि शुभेन्दु अधिकारी इस सीट पर ममता को आसानी से पराजित कर देंगे, दीदी को खुद ही यहाँ से जीत की उम्मीद नहीं है।

सियासी जानकारों के मुताबिक नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र में 12 फीसदी वोटर मुस्लिम हैं। यहाँ पीरजादा अब्बासी के नेतृत्व वाले इंडियन सेक्यूलर फ्रंट का कोई उम्मीदवार न होने की वजह से अल्पसंख्यक वोटबैंक के सेंध की आशंका बहुत कम है। ममता ने इलाके में टिकने के लिए हिंदू- बहुल्य इलाके को चुना और नियमित रूप से मंदिरों में जाती रही हैं, इससे वो यह संदेश देने में कामयाब रही हैं कि वो हिंदू विरोधी नही हैं, जैसा कि बीजेपी उनपर हमेशा आरोप लगाती रही है।

बात लेफ्ट कि करें तो उनकी तरफ से एक कमज़ोर उम्मीदवार मैदान में है। राजनीतिक समीक्षक मईदुल इस्लाम कहते हैं कि लेफ्ट ने इसके जरिये संकेत देने की कोशिश की है कि वह नंदीग्राम में ममता की हार नहीं चाहती, उसके लिए टीएमसी से बड़ी दुश्मन बीजेपी है। किसान आंदोलन के नेता भी नंदीग्राम में महापंचायत का आयोजन करके बीजेपी के खिलाफ वोट करने की अपील कर चुके हैं। अब देखना ये है कि ममता अपनी दांवपेंच से जीत हासिल कर पाती हैं या बीजेपी अपनी चाल में कामयाब होती है।

शुभेन्दु अधिकारी के पार्टी छोड़ने से टीएमसी को कितना नुकसान हुआ है यह जानने के लिए फिलहाल दो मई तक का इंतज़ार करना होगा.

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