Sunday, May 22
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भारत में Corona विस्फोट के लिए PM Modi और Amit Shah जिम्मेदार हैं?

As Coronavirus second wave in India is here, PM Narendra Modi and HM Amit Shah have been rallying in West Bengal, Assam, Tamil Nadu, Kerala without masks, setting up a wrong example. No social distance is maintained in these rallies.

Is Narendra Modi Government responsible for Coronavirus second wave in India?

The Ganga Times, Covid19 India: भारत कोविड 19 के मामलों में विश्व में दूसरे स्थान पर पहुंच चुका है। कोरोना की दूसरी लहर ने देश में खतरनाक स्थिति पैदा कर दी है। देश में कोरोना के इस भयावह वृद्धि का आरोप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उनके द्वारा दिए गए लापरवाह संदेश पर लगाया जा सकता है।

आइये इस विषय को विस्तार से समझते हैं।

आपने देखा होगा कि किस तरह से भारतीय जनता पार्टी के दो शीर्ष नेताओं — पीएम मोदी और अमित शाह ने बिना मास्क के विशाल रैलियां और रोड शो संबोधित कर कर रहे हैं। उनका ऐसा करना लोगों के दिमाग में भ्रम पैदा करता है। इन जनसमूहों के जरिये देशवासियों के बीच एक संदेश भेजा गया कि कोरोना तो अब अतीत की बात है। इस वायरस को भीड़ से लगाव है, खासकर उस भीड़ से जहाँ मास्क और शारीरिक दूरी का कोई अस्तित्व नहीं है। और फिर भारत की रैलियां तो मास्क और दूरी दोनों दोनों को ही भूल चुकी है।

Along with the Narendra Modi govt, opposition parties also need to share the responsibility of Covid outbreak

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि भाजपा ही नहीं बल्कि सभी राजनीतिक पार्टियां जैसे TMC, Congress और CPIM भी इस समस्या के लिए जिम्मेवार है। लेकिन जब देश का मुखिया जो कि लोगों के बीच ख़ासा लोकप्रिय है, वो कोरोना को हल्के में लेते हैं तो एक अलग सन्देश जाता है। लोगों पर मोदी का प्रभाव देश के किसी भी अन्य नेताओं की तुलना में कहीं ज्यादा है।

Amit Shah rallying in West Bengal without mask
Amit Shah rallying in West Bengal without mask during Coronavirus second wave in India (Courtesy: NDTV)

एक तरफ तो प्रधानमंत्री अपने मासिक प्रोग्राम ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) में कहते हैं कि मास्क जरूरी है। वहीं दूसरी तरफ, ठीक इसके उलट, वो लाखों कि भीड़ को सम्बोधित करते हैं और कहते हैं ‘What an Amazing Atmosphere’.

Narendra Modi and Amit Shah have been completely irresponsible leaders in battling Coronavirus second wave in India

देश के दो सबसे शक्तिशाली राजनीतिक हस्तियों के रूप में नरेंद्र मोदी और अमित शाह का ये उत्तरदायित्व है कि वो लोगों के सामने उदाहरण पेश करें। लेकिन महामारी के वक़्त विशाल रैलियों को प्रोत्साहित करके और कुम्भ मेले की अनुमति देकर दोनों ने कोविड से एहतियात बरतने के मामले में एक दायित्वहीन संदेश दिया है। मोदी-शाह ने दिखाया है कि उनके लिए उनकी राजनीति और चुनावी लाभ से अधिक महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है, यहां तक ​​कि उन करोड़ों लोगों की जान भी नहीं, जिनका प्रतिनिधित्व करने का वो दावा करते हैं।

Narendra Modi doesn't care for the people of India. For him, winning elections is everything.
As the country’s two biggest leaders, Narendra Modi and Amit Shah has been disappointing in guiding the people properly. (Courtesy: DNA)

यह बात परेशान करने वाली इसलिए भी है क्योंकि प्रधानमंत्री जानते हैं कि उनके शब्दों और कार्यों का क्या प्रभाव पड़ सकता है।

हमें समझना चाहिए की ये एक सामान्य परिस्थिति नहीं है। देश में हर दिन करीब एक लाख नए कोरोना केसेस का आना एक विकट परिदृश्य है और इस वक़्त रूटीन पॉलिटिक्स को पीछे हटना चाहिए।

PM Narendra Modi, unlike other global leaders, performed poorly in fighting the COVID-19 pandemic

अब आप कह सकते हैं कि चुनाव करवाना, न करवाना तो चुनाव आयोग का काम है। और जब आयोग ने चुनाव कराने का निर्णय लिया है, तो रैलियां तो होंगी ही। फिर इसमें पीएम का क्या दोष। कुछ हद तक आप सही हैं। मेरा भी मानना है कि लोकतंत्र में चुनाव समय पर होना चाहिए। महामारी के बीच अमेरिका में चुनाव हुए, इजरायल, न्यूजीलैंड और विश्व के कई देशों में हुए। लेकिन इस सभी देशों के नेताओं ने इतनी लापरवाही नहीं दिखाई। किसी भी अन्य बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने अपनी आवाम कि जिंदगी को इतना तुच्छ नहीं समझा जितना हमारे प्रधानमंत्री ने समझा है।

Norway PM Erna Solberg Fined by Police For Violating COVID-19 Social Distancing Norms While Celebrating Her 60th Birthday
Norway PM Erna Solberg Fined by Police For Violating COVID-19 Social Distancing Norms While Celebrating Her 60th Birthday (Image: Forbes)

आपको एक ताजा खबर बताता हूँ। 9 अप्रैल को नॉर्वे की प्रधानमंत्री एर्ना सोलबर्ग को COVID नियमों के उल्लंघन के लिए 20,000 क्रोनर (करीब दो लाख चालीस हजार रूपये) का जुर्माना लगाया गया था। जुर्माना क्यों लगाया गया ये भी जान लीजिये। नॉर्वे कि पीएम ने अपने 60वें जन्मदिन समारोह पर 10 के बजाय 13 लोगों को आमंत्रित कर दिया था। पुलिस के अनुसार उनकी गलती ये नहीं थी कि उन्होंने तीन ज्यादा लोग बुला लिए, बल्कि ये की वो देश की प्रधानमंत्री हैं। आम नागरिक होती तो शायद बच जाती क्योंकि वो उस डिनर पार्टी में शामिल भी नहीं थी।

खैर छोड़िये! ये सारी बातें हमसे काफी ऊपर की हैं। हमें तो ये भी नहीं पता की पिछले साल जो लाखों करोड़ रूपये पीएम केयर्स फंड में दान किये गए थे उनका क्या हुआ। देश को जब जरूरत है तो इसकी कोई चर्चा ही नहीं। शायद हम इसको खर्च करने के लिए अगले महामारी का इंतज़ार कर रहे हैं।

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