Thursday, May 19
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लॉकडाउन के एक साल, सबका बुरा हाल: One Year of Lockdown in India

It’s been a year since India went under lockdown after Covid-19 sparked in India. Indian Prime Minister Narendra Modi ordered a strict lockdown on 23rd March 2020. This has impacted Indian people’s life in many ways. Lets analyse one year of lockdown in India.

The Ganga Times, COVID 19 News: कोरोना काल, गुज़र गए एक साल…आखिर क्या है आपकी जेब का हाल? कोरोना और लॉकडाउन को मिलाकर देखा जाय तो हम एक साल का दौर यूं ही गुजार चुके हैं और अभी भी लॉकडाउन का डर बना हुआ है। कहां तो ये बोला जा रहा था कि वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) बन जाएगी, टीके लगने लगेंगे और स्थिति सामान्य हो जाएगी लेकिन अभी सब कुछ सामान्य नहीं हुआ है। आज भी दो गज दूरी, मास्क है ज़रूरी.

Impact of Covid-19 Lockdown on People

आज हम बात करेंगे लॉकडाउन और कोरोना के एक साल के वक्त में जनता की जेब और घरेलू बजट पर क्या चोट पहुँची है. कहां लगा चूना किसका दाम हुआ दूना, आज सबकी बात होगी।
आसमान से गिरे खजूर पर अटके, ये कहावत पिछले एक साल के दौरान जनता पर फिट बैठती है। कोरोना आया लॉकडाउन लगा, खुद को घर में बंद करना पड़ा और ऊपर से बढ़ती हुई मंहगाई ने तो सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। किसी की नौकरी गई तो किसी का बिजनेस ठप हुआ… किसी का धन बंटा तो किसी का मुनाफा घटा… मंहगाई बढ़ती गई और सैलरी घटती गई।

अगर हम पिछले एक साल का डेटा देखें तो डेली लाइफ में इस्तेमाल होने वाली चीजों में बीस फीसदी की मंहगाई देखने को मिलती है। साथ ही पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमतों ने तो नाकों चने चबवाए ही हैं। जब ईंधन मंहगा होगा तो हर जगह धन ज्यादा लगेगा, पेट्रोल डीज़ल से ही तो सारी चीजें यहां से वहां ले जाई जाती हैं… अब कमेंट बॉक्स में ये मत पूछिएगा कि पेट्रोल डीजल से कैसे सामान ढोया जाता है, मुझे पता है आप सब समझदार हैं समझ जाएंगे.

Covid-19 one year of lockdown in india: impact on indians

खैर… आइए तफ्सील से जानते हैं।
सही बात यही है कि पेट्रोल डीजल की कीमतों (price of petrol and diesel) ने आपका जेब हल्का कर दिया, क्योंकि कच्चे माल से आपकी हवेली तक सामान पहुंचने तक का सफर काफी लंबा होता है। इस वजह से सामान की कीमत बढ़ जाती है। एक तरफ कच्चे तेल पर सरकारें करीब तीन गुना टैक्स वसूलती हैं तो दूसरी ओर बढ़ी हुई कीमतें ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ा देती हैं, जो साल भर में 11 प्रतिशत बढ़ी है। इस लागत को वसूलने के लिए मैन्युफैक्चरिंग कंपनीज इसका भार आप और हम पर डाल देती हैं, और फिर हम लोग की रफ़्तार में थोड़ा असर पड़ता है। इसका परिणाम यह हुआ कि देश के रिटेल मंहगाई को मापने वाला कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स सीपीआई फरवरी 2021 में 5.03 प्रतिशत पर पहुंच गया, जो जनवरी में 4.06 प्रतिशत था।

What cuts your pocket during one year of lockdown?

एक रिसर्च के मुताबिक रोजमर्रा में इस्तेमाल की जाने वाली चीजें जैसे शैम्पू, साबुन, हैंडवाॅश और क्रीम की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. सरकारी आंकड़ों में भी इस बात का ज़िक्र किया गया है कि पर्सनल केयर 8 प्रतिशत तक मंहगे हुए हैं।अगर हम खाने पीने के सामानों की बात करें तो सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सालभर में नाॅनवेज आइटम सबसे ज़्यादा मंहगे हुए हैं। मांस, मछली और अंडे के दाम 11 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़े हैं।

दूसरी ओर लॉकडाउन की वजह से सरसो के तेल (mustard oil) का उपयोग बढ़ने से इसकी कीमत में करीब 21 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इसके अलावा चाय जिसको हम लोग हर रोज कहते हैं हाय… यह भी मंहगी हुई है। एक्सपर्ट्स की मानें तो नई फसल आने तक इनके मूल्यों में अभी और इजाफा होगा।

इन सबके अलावा एक सेक्टर ऐसा भी है जहां मंहगाई घटी है, वह सब्जियों की दुनिया।
सब्जियों की कीमतों के ग्राफ पर गौर करने पर 6 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट देखने को मिलती है। हालांकि सब्जियों के सस्ते होने से ग्राहकों को तो फायदा हो रहा है लेकिन किसानों को अपना लागत धन हासिल करने में मुश्किल हो रही है।

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