Thursday, May 19
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तथ्य की कसौटी पर प्रधानमंत्री मोदी की बातें कितनी खरी? PM Modi Speech Highlights

यह लेख भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन को तथ्यों की कसौटी पर परखता है। पाठकों की सुविधा के लिए भाषण में कहे गए बातों का समय अंकित किया गया है। लेख में मोदी द्वारा कही गई बातें शब्दशः नही है। हालांकि, मूल भावार्थ में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

पत्रकारिता के शुरुआती दिनों में ही हम बताया गया था “जो कहा गया वो PR, जो छुपाया गया वो REPORT। चूँकि ये शुरुआती दिनों में बताया जाता है इसलिए बहुत से पत्रकार इसे भूल जाते हैं। खैर, रहने दीजिये। हम आगे बढ़ते हैं।

प्रधानमंत्री का संबोधन लगभग 32 मिनट तक चला। उन्होंने शुरुआत कोरोना से पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए किया। हालांकि, मुझे उनकी सहानुभूति झूठी लगी। वे अगर जरा भी संवेदनशील होते तो 22 अप्रैल, 2021 को अपनी रैली में लाखों की भीड़ देख कर खुश नहीं हो रहे होते। भीड़ में उन्हें लोग नही बल्कि कोरोना से होने वाली भावी मौतें दिखती। बंगाल चुनाव जीतने की उम्मीद में वो लाखों मृतकों को भूलते हुए भीड़ के स्वागत में न लगते।

22 अप्रैल का वो वीडियो आपने ज़रूर देखा होगा। अगर नहीं, तो ढूंढ कर देखिए। लोकतंत्र में आपका प्रयास अपेक्षित है। प्रधानमंत्री इसे सदी की सबसे बड़ी महामारी बताते हैं और इससे कई मोर्चों पर लड़ाई की बात करते हैं। कुछ मोर्चों पर वो ममता बनर्जी से भी लड़ते हुए नजर आ रहे थे। मगर इन मोर्चों से वो उचित दूरी बनाए हुए नजर आएं।

3:10
प्रधानमंत्री मेडिकल ऑक्सीजन की अकल्पनीय रूप से बढ़ी जरूरतों की बात करते हैं तथा इसे बखूबी रूप से नियंत्रण करने पर अपनी पीठ थपथपाते हैं।
26 अप्रैल, 2020 को scroll.in में छपे एक रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार अक्टूबर 21, 2020 को 150 ऑक्सीजन प्लांट्स का टेंडर निकलती है, बाद में इसमें 12 प्लांट्स और बढ़ा दिए जाते हैं। दिसंबर तक सारी प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है। इन प्लांट्स का भुगतान PM Cares fund से होना था। जो मोदी 18 घंटे काम करने का दावा करते हैं उनके सरकार में राष्ट्रीय आपदा के दौरान हम लगभग 8 महीने समय गँवा चुके थे। दूसरे लहर के शुरुआत में उत्तर प्रदेश में लगे 14 प्लांट्स में से एक भी काम नही कर रहा था। तो मोदी का ये दावा भी भ्रामक है।

4:49
मोदी कोरोना से लड़ाई में मास्क और दूरी को अहम बताते हैं। लेकिन यह नही बताते की बंगाल चुनाव के दौरान उनकी कितनी रैलियों में इसका ध्यान रखा गया? और, अगर नहीं। तो क्यों? खुद गृह मंत्री रोड शो में कितनी दफा बिना मास्क के नजर आए। क्या कोविड प्रोटोकाल तोड़ने के लिए गृह मंत्री पर कोई करवाई हुई या होगी?

6:43
प्रधानमंत्री मिशन इंद्रधनुष की बात करते हैं। क्यों? हमें नहीं पता। वो कहते हैं “हमारी सरकार आने से पहले इस देश में वैक्सीनेशन रेट 60% था जो इंद्रधनुष के बाद बढ़ कर 90% तक पहुंच गया है। मजेदार बात यह है की वैक्सीनेशन रेट 90 तक पहुंचा नही है बल्कि 90 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री यहां भी गफलत करते पकड़े गए।

11:06
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री वैक्सीन ढुलाई की व्यवस्था की बात करते हैं। वो कहते हैं, “हमें अपने वैज्ञानिकों पर पूरा भरोसा था। जब देश में हजार से भी कम मामले थे तभी हमने vaccine task force का गठन कर दिया था। सरकार ने वैक्सीन डेवलपमेंट के लिए हजारों करोड़ दिए”।
9 मई को सुप्रीम कोर्ट में दिए एक हलफनामे में केंद्र सरकार वैक्सीन डेवलपमेंट पर मात्र 46 करोड़ देने की बात करती है।

वैक्सीन से पहले वैक्सीन की ढुलाई की व्यवस्था जैसी दूरदर्शी सोच पर हमें गर्व करना चाहिए।
जब सरकार इतनी तत्पर पर थी तो क्यों वैक्सीन की एडवांस बुकिंग नही की गई? वैक्सीन की कमी के चलते कितने ही सेंटर्स बंद हो गए। ऐसे में हमें मनोहर लाल के मनोहर युक्ति को याद करना चाहिए। थोड़ा थोड़ा वैक्सीन लगाएं और ढेर दिन तक चलाएं।

12:56
मोदी वैक्सीन खरीदी की प्रक्रिया में तेजी की बात करते हैं। मगर, केंद्र सरकार ने शुरुआत में फाइजर जैसी कंपनियों को अनुमति नहीं दी। ये फैसले कौन कर रहा था? शुरुआत में अनुमति न देने के बाद फिर अनुमति कैसे दे दी गई? मोदी अपनी इस जिम्मेदारी से भाग नही सकते।

17:00
संबोधन के सत्रहवें मिनट में वे बड़ी चालाकी से स्वास्थ्य को राज्य का विषय बता देते हैं। तो फिर क्यों पिछली बार पैंडेमिक एक्ट लागू किया गया था। महज, 4 घंटे की सूचना पर तालाबंदी करने से पहले उन्होंने कितने मुख्यमंत्रियों से सलाह ली थी? दरअसल, बिगड़े हालात के चलते मोदी अपना पल्ला झाड़ रहे थे।

18:58
मोदी बार बार मई में दूसरी लहर आने की बात कर रहे थे। जबकि दूसरी लहर अप्रैल में ही दस्तक दे चुकी थी। हालांकि, मुझे उनकी यह बात अच्छी लगी। अपनी चुनावी रैलियों के तारीख बढ़ाने के बजाय दूसरी लहर की माह बढ़ा देना ज्यादा सुविधाजनक समझा।
वैक्सीन पॉलिसी की हो रही किरकिरी पर उन्होंने कहा की राज्यों ने खुद इसकी मांग की थी। जबकि राज्य शुरू से ही वैक्सीन के लिए केंद्र से आग्रह कर रहे थे। वैश्विक बाजार में राज्यों को वैक्सीन विक्रेता वैक्सीन देने पर राजी नहीं हो रहे थे। क्यों एक ही वैक्सीन केंद्र को सस्ते और राज्यों के महंगे दामों पर मिल रहे थे? मोदी ये सारे सवाल टाल गए।

27:52
प्रधानमंत्री अभी वाद विवाद और आपसी राजनीतिक छींटाकशी से दूरी बनाने का आग्रह करते हैं। लेकिन, दूसरी तरफ केंद्र और बंगाल सरकार में आपसी रंजिश को बढ़ावा देते हैं। वैसे, दीदी ओ दीदी! राजनीतिक छींटाकशी के अंतर्गत आएगा या नही? ओ अच्छा! उस समय मोदी बंगाल जीतने के उम्मीद में कोरोना को भूल चुके थे।

30: 12
मोदी वैक्सीन पर भ्रम फैलाने वालों को समाज का दुश्मन बताते हैं। लेकिन रामदेव के ऊपर करवाई करने से बचते हैं। रामदेव खुले तौर पर वैक्सीन लेने से मना कर चुके हैं, और उस पर सवालिया निशान भी लगा चुके हैं।लेकिन आजाद भारत का सबसे मजबूत नेता भी रामदेव के आगे नतमस्तक हो जाता है। रामदेव पूछते हैं “किसी के बाप में इतनी हिम्मत है की मुझे गिरफ्तार कर ले?” चारों ओर शांति छा जाती है। मोदी हर्षवर्धन और गडकरी को याद करते हुए भावुक हो जाते हैं। चुकी वो अभी हाल में ही रो चुके हैं और भावुकता का ओवरडोज न हो जाए इसलिए पर्दा गिर जाता है।

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