अशोक चक्र से सम्मानित बिहार रेजिमेंट के जवान: Army Day 2021

Bihar Regiment of the Indian Army has been one of the highly decorated infantry regiment over the years. Headquartered in Danapur, Patna, the Bihar Regiment is among the largest in the country.

बिहार रेजिमेंट भारतीय सेना की सबसे बड़ी और बहादुर टुकड़ियों में से एक मानी जाती है। देश की आज़ादी के बाद से इस रेजिमेंट ने कई बहादुर सैनिक भारत माता को दिए हैं। आइये जानते हैं ऐसे ही कुछ जाँबाजों के बारे में जिन्हे अशोक चक्र प्रदान किया गया है। (A list of 4 Ashok Chakra recipients from Bihar Regiment)

लेफ्टिनेंट कर्नल हर्ष उदय सिंह गौड़ (मरणोपरांत), 1994 (Lieutenant Harsh Uday Singh Gaur (Posthumous)

उदय सिंह गौड़ (Lt Colonel Uday Singh Gaur) का जन्म 1953 में उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में हुआ था। उनके पिता का नाम राजेंद्र सिंह गौर था। नेहरू कॉलेज से स्नातक करने के बाद उन्होंने सितंबर 1973 में ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी ज्वाइन की और 12 मई 1974 को बिहार रेजिमेंट में दूसरे लेफ्टिनेंट (Bihar Regiment second lieutenant) के रूप में एक शॉर्ट-सर्विस कमीशन (short service commission) प्राप्त किया। 9 जुलाई 1981 को उन्हें भारतीय सेना में कप्तान बनाया गया।

29 नवंबर 1994 को बारामूला जिले (Baramulla District) के दाजीपुरा गाँव में आतंकवादियों का सफाया करते हुए उदय सिंह भारत माता (Bharat Mata) की गोद में हमेशा के लिए सो गए। ऑपरेशन का नेतृत्व करते हुए उन्होंने तीन आतंकवादियों को मार गिराया था।

लेफ्टिनेंट कर्नल शांति स्वरूप राणा (मरणोपरांत), 1997 (Lieutenant colonel Shanti Swaroop Rana)

लेफ्टिनेंट कर्नल शांति स्वरूप राणा (Lieutenant colonel Shanti Swaroop Rana) 11 जून, 1977 को भारतीय सेना के बिहार रेजिमेंट की तीसरी बटालियन में नियुक्त हुए। सेना के प्रति उनकी दीवानगी बचपन से ही थी। शुरुआत में आर्मी कैडेट कॉलेज, देहरादून (Army Cadet College, Dehradun) से अपना प्रशिक्षण पूरा करने के बाद, उन्हें 11 जुलाई 1977 को 3 बिहार में न्युक्ति मिली।

2 नवंबर 1996 को, लेफ्टिनेंट कर्नल स्वरूप राणा को जम्मू और कश्मीर में कुपवाड़ा जिले (Kupwara District of Jammu & Kashmir) में दो आतंकवादी शिविरों को नष्ट करने का काम सौंपा गया था। अपनी वीरता और पराक्रम से उन्होंने इन ठिकानों को नष्ट कर दिया। लेकिन इसके बाद हुई कार्रवाई के दौरान, आतंकवादियों ने भारत का एक लाल हमसे छीन लिया।

मेजर संदीप उन्नीकृष्णन (मरणोपरांत), 2009 (Major Sandeep Unnikrishnan)

संदीप उन्नीकृष्णन (15 मार्च 1977 – 28 नवंबर 2008) भारतीय सेना के राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (National Security Guard) के स्पेशल टास्क फ़ोर्स में सेवारत थे। नवंबर 2008 के मुंबई हमलों (26/11 Mumbai Attacks) के दौरान बहादुरी से लड़ते हुए वो शहीद हो गए थे। इसके बाद उन्हें राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा 26 जनवरी 2009 को अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।

कॉर्पोरल ज्योति प्रकाश निराला एसी, गरुड़ कैममांडो बल के सदस्य थे और उन्हें मरणोपरांत प्रदान किया गया था। (Corporal Jyoti Prakash Nirala)

कॉर्पोरल ज्योति प्रकाश निराला, (15 नवंबर 1986 – 18 नवंबर 2017) गरुड़ कमांडो फोर्स के सदस्य थे। निराला बिहार के रोहतास जिले के बड़लाडीह गाँव के निवासी थे। उन्हें मरणोपरांत जनवरी 2018 में भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। वह ग्राउंड कॉम्बैट का पुरस्कार पाने वाले पहले एयरमैन हैं और सुहास विश्वास और राकेश शर्मा के बाद इसे प्राप्त करने वाले केवल तीसरे व्यक्ति हैं।
निराला 2005 में भारतीय वायु सेना के गरुड़ कमांडो फोर्स में शामिल हुए। उनकी यूनिट 13 राष्ट्रीय राइफल्स में प्रतिनियुक्त थी और ऑपरेशन रक्षक के तहत जम्मू और कश्मीर में तैनात थी।

आप सभी को गंगा टाइम्स जी तरफ से भारतीय थल सेना दिवस की शुभकामनाएँ।

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